
How Fashion Industry is DESTROYING the World? | Microplastics in Your Clothes | Dhruv Rathee
Dhruv Rathee
फास्ट फैशन उद्योग ने कपड़ों की खरीदारी को एक लत बना दिया है, जिससे पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहे हैं। कंपनियां 'माइक्रो-सीजन्स' और FOMO जैसी मनोवैज्ञानिक चालों का उपयोग करके अत्यधिक उपभोग को बढ़ावा देती हैं। सिंथेटिक कपड़ों से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक्स समुद्री जीवन और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं, जबकि कपास की खेती के लिए अत्यधिक पानी की खपत ने अराल सागर जैसे जल स्रोतों को रेगिस्तान में बदल दिया है। हर साल लाखों टन अनबिके कपड़े अटाकामा रेगिस्तान और घाना जैसे देशों में कचरे के रूप में फेंके जाते हैं। इस समस्या का समाधान सचेत उपभोग में निहित है, जिसमें कपड़ों को लंबे समय तक पहनना, मरम्मत करना और ऑर्गेनिक कॉटन, लिनन या हेम्प जैसे टिकाऊ विकल्पों का चयन करना शामिल है। व्यक्तिगत स्तर पर जिम्मेदारी अपनाकर ही इस पर्यावरणीय और सामाजिक आपातकाल को नियंत्रित किया जा सकता है।
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